ऐ दिल...
ऐ दिल! चलो एक बार फिर मचल जाएँ,
इश्क के प्याले फिर गटक जाएँ!!
आज एक बार फिर बहक जाएँ,
चलो एक बार फिर महक जाएँ!!
आज की रात में ये कसक क्यूँ है??
रात रानी सी ये महक क्यूँ है??
ख्वाब हम भी बुनते हैं पर ख़्वाबों में जीते नहीं,
फिर आज इन आँखों में ये कशिश क्यूँ है?
कहो दिल क्या एक बार फिर मचल जाएँ??
क्या एक बार फिर बहक जाएँ!!
उनकी जुल्फों की छाँव में खो जाना है,
प्यार के गीत फिर गुनगुनाना है!
आज फिर दिल ने ये तमन्ना की है..
जाम पीना है तो बस उनके हुस्न का ही पीना है!!
तो चलो दिल! एक बार फिर बहक जाएँ,
इश्क के प्याले फिर गटक जाएँ!!
रात चाहे ये कितनी ही काली क्यूँ न हो!
इन बादलों को चीर कर ही क्यूँ न चाँद को आना हो!
ग़ालिब की नज्मों का जादू अभी जिंदा है,
फिर इन कोरी निगाहों में कभी तो उन्हें भी आना है,
हाँ दिल! आज नहीं तो कल, उन्हें आना है...
तो फिर चलो एक बार फिर बहक जाएँ..
चलो एक बार फिर महक जाएँ..!!